पौराणिक इतिहास

जगन्नाथ पुरी का इतिहास

🔹 नीलमाधव की कथा (सबसे प्राचीन कथा)

पुरी जगन्नाथ मंदिर की शुरुआत नीलमाधव की कथा से होती है।

  • प्राचीन समय में विदर्भ देश में राजा इन्द्रद्युम्न राज्य करते थे।
  • उन्हें पता चला कि नील नामक पर्वत पर जंगल के बीच एक सुंदर देवता नीलमाधव (श्रीकृष्ण) की पूजा होती है।
  • राजा ने उस रहस्यमय देवता के दर्शन की इच्छा की, लेकिन वे वहाँ पहुँच नहीं सके।
  • इसके बाद देवता स्वयं अदृश्य हो गए।

राजा इन्द्रद्युम्न को स्वप्न में आदेश मिला कि वे समुद्र तट पर एक मंदिर बनवाएँ और भगवान स्वयं अद्भुत रूप में प्रकट होंगे।

इसी कथा से जगन्नाथ मंदिर की स्थापना की शुरुआत मानी जाती है।

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2. भगवान जगन्नाथ के स्वरूप की कथा

राजा को आदेश मिला कि समुद्र तट पर बहकर आने वाली एक विचित्र लकड़ी (दारु-ब्रह्म) से भगवान की मूर्तियाँ बनानी हैं।
यह लकड़ी आज भी पवित्र मानी जाती है।

🔹 विश्वकर्मा की मूर्ति निर्माण कथा

कथा के अनुसार—

  • एक रहस्यमय साधु (कुछ लोग उन्हें विश्वकर्मा मानते हैं) आए।
  • उन्होंने कहा कि वे भगवान की मूर्तियाँ बनाएँगे, लेकिन जब तक वे स्वयं बाहर न आएँ, कोई भी दरवाज़ा न खोले।
  • कई दिन बीत गए, राजा चिंतित हो गया और दरवाज़ा खोल दिया।
  • मूर्ति अधूरी अवस्था में ही रह गई — हाथ-पाँव छोटे, आँखें बड़ी, चेहरा अनोखा।

इसी कारण जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ आज भी अधूरी दिखाई देती हैं,
और इन्हें दिव्य और अनंत ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।


3. मंदिर का निर्माण इतिहास

🔹 पहले मंदिर का निर्माता

  • पहले जगन्नाथ मंदिर का निर्माण राजा इन्द्रद्युम्न ने करवाया।
  • वे पुरी के पहले भक्ति-राजा माने जाते हैं।

🔹 वर्तमान मंदिर

  • वर्तमान विशाल मंदिर का निर्माण गंगा वंश के राजा अनंगभीम देव (12वीं शताब्दी) ने करवाया।
  • यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का अनोखा नमूना है।

4. जगन्नाथ पुरी क्यों चारधाम बना?

आदि शंकराचार्य ने भारत के चार प्रमुख तीर्थ तय किए:

  • उत्तर – बद्रीनाथ
  • दक्षिण – रामेश्वरम
  • पश्चिम – द्वारका
  • पूर्व – जगन्नाथ पुरी

पुरी को “पूर्व का द्वार” कहा जाता है, जहाँ भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों को सहज दर्शन देते हैं।


5. नबकलैवर परंपरा (Murtियों का परिवर्तन)

जगन्नाथ पुरी दुनिया का एकमात्र मंदिर है जहाँ:

  • हर 12–19 वर्षों में भगवान की मूर्तियाँ बदल दी जाती हैं।
  • इसे नबकलैवर (नया शरीर) कहा जाता है।
  • मूर्तियाँ पवित्र नीम वृक्ष से बनाई जाती हैं, जिसका चयन विशेष शास्त्रीय नियमों से होता है।

6. मुस्लिम आक्रमण और पुनर्निर्माण

मध्यकाल में कई बार मंदिर पर आक्रमण हुए:

  • बंगाल के मुस्लिम शासकों ने कई बार मंदिर को लूटने का प्रयास किया।
  • हर बार भगवान की मूर्तियों को सुरक्षित जंगलों में ले जाकर छुपाया गया
  • बाद में मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार किया गया।

7. रथयात्रा का इतिहास

पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा की परंपरा सहस्रों वर्ष पुरानी मानी जाती है।

  • भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा विशाल रथों में अपने भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं।
  • कहा जाता है कि इस दिन भगवान स्वयं भक्तों के बीच आते हैं।

🕉️ सार रूप में

जगन्नाथ पुरी का इतिहास—

  • पौराणिक
  • धार्मिक
  • सांस्कृतिक
  • और स्थापत्य कला

चारों रूपों में अत्यंत अद्भुत और अद्वितीय है।
यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के “जगन्नाथ” रूप की महिमा का शाश्वत प्रतीक है।